बुरे सपनों से बचने के ज्योतिष उपाय

दस महाविद्या बड़ी प्रभावशाली है।  इनके मंत्रो में भी उतनी ही सकती है। इनके मंत्रो से विपदायों, विरोधियों, शत्रुयों का शमन करना सभंव है। हम अपनी इस पोस्ट में आपको कुछ ऐसे ही प्रयोग बताने जा रहे है।

दु:स्वप्न से भयभीत होने पर 

रात में सोते अक्सर बच्चे – औरतें चिल्लाकर जाग जाती हैं ये स्वप्न में भयानक शक्लें दिखाई देती हैं, जिनसे भय समा जाता है अथवा रोगी को किसी प्रकार की बुरी आत्मा सताती हो तो निम्नलिखित प्रयोग करें –
किसी एकांत – शांत कमरे में बैठकर मां काली की प्रतिमा स्थापित करके एक वेदी और हवनकुंड बनाएं। फिर नागरमोथा, चावल, घी, गूलर की जड़ आदि मिलकर हवन सामग्री तैयार करें। रोगी से नागरमोथा, विजया, गुलाब – पत्ती तथा कालीमिर्च काफी बारीक पिसबकर मूल काली मन्त्र पढ़तें हुए रोगी को 10 ग्राम खिलाएं। ऊपर से पर्याप्त मात्रा में ताजा दूध या घी पिलाएं।
इससे शरीर शुद्ध हो जायेगा। इसके अलावा कपूर, लौंग, नागरमोथा, हल्दी, कुंकुम, केसर, सरसों तथा निर्गुडी – सभी वस्तुयों पर 9-9 बार मंत्र जप करते हुए उसे काली पर चढ़ाएं। तत्पश्चात सरसों का तेल अभिमंत्रित करें और सभी वस्तुओं को पीसकर तेल में मिला दें।

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तत्पश्चात मन्त्र पढ़ते हुए तेल को बेल के दोने से रोगी के सिर पर डालें। इस प्रकार 108 बार सिर पर तेल डालें शरीर पर वस्त्र काम से काम तथा ढीले पहनाएं। तेल रोगी के सिर से सरे बदन पर धीरे धीरे रिसने दें। जप संख्या पूरी होने पर रोगी को किसी टब में बैठाएं ताकि तेल बर्बाद न हो।
यह तेल अगले दिन काम आएगा। तत्पश्चात 9 घड़ों को मन्त्र से अभिमंत्रित करते हुए रोगी को स्नान कराएं। फिर स्वच्छ वस्त्र पहनकर उसे भोजन कराएं। भोजन में दूध तथा घी की मंत्र अधिक होनी चाहिए। यह क्रिया कृष्ण पक्ष के पंद्रह दिनों तक करें।
नागरमोथा, विजय एवं काली मिर्च का बचा हुआ भाग चूर्ण बनाकर रख लें। उसे 5 ग्राम गुलाब की पत्ती, बेल की पत्ती या हरसिंगार की पत्ती के साथ पीसकर प्रतिदिन सायंकाल एक महीने तक सेवन कराएं। इसके प्रभाब से अनिद्रा, तन्द्रा, मसितष्क विकार, उदासी, खिन्नता आदि रोग भी दूर हो जाते हैं। मन्त्र निम्नवत है –
 

ॐ नमः: क्रीं क्रीं क्रीं क्लीं ह्रीं वं शं षं सं हं फटर स्वाहा। 

 
रात में सोते समय सिरहाने एक लोटा जल रखकर उस पर किसी पात्र में एक दीपक ( देशी घी का ) तथा दो अगरबत्तियां जलाकर मां काली का नाम लेकर सो जाएं। किसी प्रकार की बाधा, भूत – प्रेत आदि नजदीक नहीं आयेंगे। इससे माता काली की चौकी स्थापित हो जाती है जो रोगी की हर प्रकार से रक्षा करती है।
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